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शिव मंदिर में कछुआ और नन्दी की पूजा क्यों ?
श्रावण मास आते ही शिव मन्दिर में शिव के भक्तगणों की भीड़ थामे नहीं थमती है। हर तरफ शिवमय वातावरण रहता है। बच्चे हों या बूढ़े सभी महादेव...
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लेखक - भवभूति विधा - नाटक प्रधान रस - करुण रीति - वैदर्भी रीति करुण प्रसंगों में और वीर रस के प्रसंगों में गौडी अङ्क - सात उपजीव्य - 1...
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महाकवि ने वर्णन की दृष्टि से मेघदूत को दो भागों में विभक्त किया है 1. पूर्वमेघ 2. उत्तरमेघ। पूर्वमेघ में अलका के लिए प्रस्थान करने वाले मेघ ...
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इस खण्डकाव्य के लेखक महाकवि कालिदास है । यह खण्डकाव्य दूतकाव्य के रूप में एक गीतिकाव्य है, जिसमें एक यक्ष का विरह वर्णित है । संस्कृत के ग...
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